नई दिल्ली/पुरी: भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने अपने जीवन के अनुभवों और श्रीजगन्नाथ प्रभु के प्रति अपनी अटूट आस्था को साझा करते हुए एक हृदयस्पर्शी लेख लिखा है। ‘इस विशाल पथ पर’ शीर्षक से लिखे इस लेख में उन्होंने राष्ट्रपति बनने के सफर को महाप्रभु की कृपा का फल बताया है।
महाप्रभु के साथ बचपन का जुड़ाव
राष्ट्रपति ने अपने बचपन की यादों को ताजा करते हुए बताया कि मयूरभंज के उपरबेड़ा गाँव से शुरू हुआ उनका सफर आज सर्वोच्च पद तक पहुँचा है, जिसमें हर कदम पर जगन्नाथ जी का आशीर्वाद रहा है। उन्होंने कहा, “मैं महाप्रभु की बेटी हूँ। मेरे जीवन के उत्थान-पतन और सुख-दुख के वही नियंता हैं।”
जब प्रोटोकॉल तोड़कर नंगे पैर चलीं राष्ट्रपति
लेख में 10 नवंबर 2022 की उस घटना का विशेष उल्लेख है, जब राष्ट्रपति के रूप में पुरी यात्रा के दौरान उन्होंने अपनी गाड़ी रुकवा दी थी। सिंहद्वार पहुँचने से लगभग दो किलोमीटर पहले ही उन्होंने प्रोटोकॉल की परवाह किए बिना नंगे पैर चलना शुरू कर दिया। उन्होंने कहा, “जगन्नाथ जी के ‘विशाल पथ’ (बोड़ो दांडो) पर किसी प्रोटोकॉल की आवश्यकता नहीं है।” सिंहद्वार पहुँचकर उन्होंने पावन-पथ की धूल में साष्टांग लेटकर महाप्रभु को प्रणाम किया।
शपथ ग्रहण के समय प्रभु का स्मरण
राष्ट्रपति ने साझा किया कि 25 जुलाई 2022 को जब वह शपथ लेने जा रही थीं, तब भी वह निरंतर महाप्रभु का ही ध्यान कर रही थीं। उनके अनुसार, “राष्ट्रपति के रूप में मेरे प्रथम भाषण के समय ऐसा महसूस हुआ मानो प्रभु मेरे साथ ही खड़े हों।”
समानता के संदेशवाहक हैं जगन्नाथ
महाप्रभु जगन्नाथ की महिमा का बखान करते हुए उन्होंने कहा कि प्रभु की गोल-गोल आँखें कभी नहीं झपकतीं, जो यह संदेश देती हैं कि वे हर समय जगत के दुखों को दूर करने के लिए जागृत रहते हैं। उन्होंने जगन्नाथ जी को ‘समता के मंत्र’ का प्रतीक बताया और कहा कि प्रभु की करुणा से ही उन्हें समाज के हर वर्ग की सेवा करने की प्रेरणा मिलती है।
राष्ट्रपति का यह संस्मरण महाप्रभु के प्रति एक भक्त के समर्पण और उनके दिव्य आशीर्वाद के अटूट विश्वास का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।


