छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ के दिव्यांगजनों के लिए बड़ी सौगात: 11 हजार लोगों को मिलेगा स्वरोजगार के लिए ऋण – कांवड़िया

रायपुर: छत्तीसगढ़ सरकार प्रदेश के दिव्यांगजनों को मुख्यधारा में शामिल करने और उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। छत्तीसगढ़ दिव्यांगजन वित्त एवं विकास निगम ने प्रदेश के 11 हजार दिव्यांगजनों को स्वरोजगार के लिए ऋण उपलब्ध कराने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है।

​लोकेश कवाड़िया ने दी जानकारी

​छत्तीसगढ़ दिव्यांगजन वित्त एवं विकास निगम के अध्यक्ष श्री लोकेश कवाड़िया ने आज प्रमुख बैंकों के प्रतिनिधियों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक की। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार का लक्ष्य मात्र ऋण देना नहीं, बल्कि प्रत्येक लाभार्थी को एक सफल उद्यमी बनाना है।

​प्रशिक्षण हुआ अनिवार्य

​इस योजना की सबसे बड़ी विशेषता इसका ‘समग्र दृष्टिकोण’ है। अब ऋण लेने वाले प्रत्येक लाभार्थी के लिए कौशल विकास प्रशिक्षण अनिवार्य कर दिया गया है। निगम द्वारा बनाए गए विशेष प्रशिक्षण केंद्रों में हितग्राहियों को केवल तकनीकी कौशल ही नहीं, बल्कि:

  • ​वित्तीय प्रबंधन (Financial Management)
  • ​उद्यमिता विकास (Entrepreneurship)
  • ​व्यवसाय संचालन का कौशल (Business Operations) भी सिखाया जाएगा।

​व्यवसाय के लिए विशेष सहायता

​निगम ने योजना को धरातल पर सफल बनाने के लिए निम्नलिखित व्यवस्थाएं भी की हैं:

  • ​व्यावसायिक परामर्श: व्यवसाय शुरू करने और उसे संभालने के लिए नियमित मार्गदर्शन।
  • ​विपणन सहायता: बाजार तक पहुंच बनाने के लिए सहयोग।
  • ​व्यवहार्य उद्यम: विशेष रूप से लॉन्ड्री, किराना, रेडीमेड गारमेंट्स, जूते-चप्पल और दैनिक उपयोग की वस्तुओं के व्यवसाय को प्राथमिकता।

​बैंकों की भूमिका और सरलीकरण

​बैठक में बैंक ऑफ बड़ौदा, यूनियन बैंक, पीएनबी, एचडीएफसी सहित कई प्रमुख बैंकों के प्रतिनिधि शामिल हुए। NDFDC ने बैंकों को पूरा सहयोग और पुनर्वित्त (Refinance) देने का आश्वासन दिया है। साथ ही, ऋण प्रक्रिया को और अधिक सरल और पारदर्शी बनाने पर सहमति बनी है ताकि दिव्यांगजनों को किसी भी प्रकार की परेशानी न हो।

​”दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाकर उन्हें प्रदेश की आर्थिक प्रगति का सहभागी बनाना ही राज्य सरकार का मुख्य उद्देश्य है।”

— लोकेश कवाड़िया, अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ दिव्यांगजन वित्त एवं विकास निगम

 

​निष्कर्ष: सरकार का यह निर्णय प्रदेश के दिव्यांगजनों के जीवन में एक बड़ा सकारात्मक बदलाव ला सकता है। एक ही छत के नीचे ऋण, प्रशिक्षण और मार्गदर्शन मिलने से निश्चित ही छत्तीसगढ़ में हजारों नए दिव्यांग उद्यमी उभरकर सामने आएंगे।

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