बिलासपुर, 10 जुलाई 2026
बिलासपुर में राजस्व कामकाज में पारदर्शिता और गति लाने के उद्देश्य से कलेक्टर श्री संजय अग्रवाल ने शुक्रवार को बिलासपुर एवं सकरी तहसील कार्यालयों का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने फाइलों के ढेर और लंबित मामलों की धीमी रफ्तार पर गहरी नाराजगी जताई और अधिकारियों को चेतावनी देते हुए तय समय-सीमा में कार्य पूर्ण करने के सख्त निर्देश दिए।
’जवाबदेही तय, बहाने नहीं’
कलेक्टर ने निरीक्षण के दौरान लंबित फाइलों की बारीकी से जांच की। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि एक वर्ष से अधिक समय से अटके हुए मामलों को ‘टॉप प्रायोरिटी’ पर रखा जाए। कलेक्टर ने कहा, “जनता को सरकारी दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें, इसके लिए राजस्व अमला सक्रिय होकर कार्य करे। फाइलों का अंबार नहीं, बल्कि निराकरण महत्वपूर्ण है।”
सुधार के मुख्य बिंदु:
- नक्शा बटांकन और सीमांकन पर जोर: कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि नक्शा बटांकन और सीमांकन न होने से आम नागरिक सबसे अधिक परेशान होते हैं। इन कार्यों को प्राथमिकता सूची में सबसे ऊपर रखने के निर्देश दिए गए हैं।
- अभिलेखों का डिजिटलीकरण और रखरखाव: उन्होंने तहसीलों में रखे जाने वाले पुराने अभिलेखों के सुव्यवस्थित रखरखाव पर जोर दिया ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की त्रुटि न हो और जानकारी त्वरित मिल सके।
- फील्ड पर नजर: कलेक्टर ने न केवल फाइलों का निरीक्षण किया, बल्कि कार्यालय परिसर में मौजूद आम नागरिकों से मिलकर उनकी समस्याएं सुनीं। कई मामलों में उन्होंने मौके पर ही संबंधित नायब तहसीलदारों और पटवारियों को सुधार के निर्देश दिए।
वकीलों और नागरिकों से सीधा संवाद
निरीक्षण के दौरान, कलेक्टर श्री अग्रवाल ने राजस्व न्यायालय में पैरवी करने वाले अधिवक्ताओं से भी चर्चा की। उन्होंने न्यायालयों में प्रकरणों के त्वरित निपटारे के लिए वकीलों से व्यावहारिक सुझाव मांगे। एक वकील ने बताया कि फाइलों के समय पर न मिलने से केस लटक जाते हैं, जिस पर कलेक्टर ने तहसीलदारों को सिस्टम में सुधार के सख्त निर्देश दिए।
इस दौरान अपर कलेक्टर श्री शिवकुमार बनर्जी, राजस्व विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और तहसील कार्यालय का पूरा अमला उपस्थित रहा।


