नई दिल्ली:
कोविड-19 महामारी के कठिन समय में छोटे स्तर के उत्पादकों और उद्यमों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू की गई ‘प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम औपचारिकीकरण योजना’ (PMFME) ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल कर ली है। इस योजना के तहत अब तक ऋण से जुड़ी दो लाख से अधिक मंजूरियां दी जा चुकी हैं। केंद्रीय मंत्री श्री चिराग पासवान द्वारा लिखे गए एक आलेख के अनुसार, यह योजना ग्रामीण और छोटे शहरों के उद्यमियों को आत्मनिर्भर बनाने में मील का पत्थर साबित हो रही है।
प्रमुख बिंदु और आंकड़े:
- दो लाख से अधिक मंजूरियां: पीएमएफएमई योजना के तहत देश भर में सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों के लिए 2 लाख से ज्यादा ऋण मंजूर किए जा चुके हैं।
- महिलाओं की अग्रणी भूमिका: कुल मंजूरियों में से लगभग 44 प्रतिशत लाभ महिलाओं के नेतृत्व वाले उद्यमों को मिला है। इसके अलावा, 4 लाख से अधिक स्व-सहायता समूह (SHG) के सदस्यों को उनके व्यवसाय को उन्नत बनाने के लिए शुरुआती पूंजी प्राप्त हुई है।
- बड़ा निवेश और रोजगार: इस पूरी योजना के माध्यम से 20,300 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश आकर्षित हुआ है और लगभग छह लाख लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा हुए हैं।
- औपचारिक अर्थव्यवस्था से जुड़ाव: 75,000 से अधिक इकाइयां उद्यम पंजीकरण, FSSAI और GST अनुपालन के जरिए औपचारिक अर्थव्यवस्था का हिस्सा बन चुकी हैं।
सफलता की प्रेरक कहानियां:
- पहली मंजूरी (श्री जमनालाल पाटीदार): इस योजना के तहत सबसे पहली मंजूरी 10वीं पास श्री जमनालाल पाटीदार को मिली थी। खाद्य प्रसंस्करण का कोई पूर्व अनुभव न होने के बावजूद, उन्होंने ₹10 लाख के निवेश के साथ धनिया प्रसंस्करण इकाई शुरू की, जो आज पाँच से ज़्यादा लोगों को रोजगार दे रही है।
- दो लाखवीं मंजूरी (श्री इंदरजीत सिंह): रांची के रहने वाले श्री इंदरजीत सिंह को इस योजना की दो लाखवीं मंजूरी मिली है। वे एक बेकरी यूनिट चला रहे हैं और अपने उत्पादों को पूरे झारखंड में लोकप्रिय बनाने का सपना देख रहे हैं।
योजना का मुख्य उद्देश्य और भविष्य की दिशा:
यह योजना उन छोटे उद्यमियों को वित्तीय सहायता, आधुनिक तकनीक, ब्रांडिंग, क्षमता निर्माण और बाजार तक पहुंच प्रदान करती है जो लंबे समय तक औपचारिक वित्त से दूर थे।


