सीपत।सीपत के पुराना धान मंडी परिसर में रविवार को विशाल हिंदू सम्मेलन का भव्य आयोजन किया गया। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य हिंदू समाज को संगठित करना, सामाजिक समरसता को मजबूत करना तथा राष्ट्र निर्माण में समाज की सक्रिय सहभागिता को लेकर जागरूकता फैलाना रहा। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में मातृशक्ति, युवा, सामाजिक कार्यकर्ता, धर्मप्रेमी एवं विभिन्न समाजों के वरिष्ठजन उपस्थित रहे। कार्यक्रम की शुरुआत भारतमाता की प्रतिमा पर पुष्पमाल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुई। मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांतीय कार्यवाह चंद्रशेखर देवांगन ने भारत माता की जय के उद्घोष के साथ अपने उद्बोधन की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि भारत शिक्षा, ज्ञान, कला और संस्कृति के क्षेत्र में विश्वगुरु रहा है। हिंदू समाज में सभी समाजों और विचारों को आत्मसात करने की अद्भुत क्षमता है। जब-जब देवालय नष्ट किए गए, तब हिंदू समाज ने घर-घर में मंदिर बनाकर अपनी संस्कृति और आस्था को जीवित रखा।

उन्होंने कहा कि समाज को बचाने और दिशा देने का कार्य संत समाज ने सदैव किया है। आज़ादी के बाद से अब तक भारत की विकास यात्रा का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारत केवल सहयोग की बात नहीं करता, बल्कि करके दिखाता है। आज भारत की शक्ति और सामर्थ्य को पूरा विश्व सम्मान की दृष्टि से देख रहा है। देवांगन ने कहा कि समाज को सशक्त बनाने के लिए पंचपरिवर्तन आवश्यक है, जिसमें सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, नागरिक शिष्टाचार और स्व का बोध शामिल है। उन्होंने कहा कि भारत माता की सच्ची जय तभी होगी, जब देश का नागरिक भारत के लिए जिएगा, परिश्रम करेगा और आवश्यकता पडऩे पर राष्ट्र के लिए सर्वस्व अर्पित करेगा।
हिंदुत्व जीवन जीने की श्रेष्ठ पद्धति, यही राष्ट्र को जोडऩे की शक्ति : स्वामी वासुदेव जी महाराज
मुख्य अतिथि राष्ट्रीय संत समिति के जिलाध्यक्ष स्वामी वासुदास जी महाराज ने कहा कि हिंदुत्व केवल धर्म नहीं, बल्कि मानव जीवन को श्रेष्ठ बनाने की जीवन पद्धति है। उन्होंने कहा कि वसुधैव कुटुंबकम और सर्वे भवन्तु सुखिन: जैसे विचार हिंदू संस्कृति की महानता को दर्शाते हैं। समाज को जोडऩे, संस्कारों को बचाने और युवाओं को सही दिशा देने में संत समाज की भूमिका सदैव महत्वपूर्ण रही है।
बच्चों को पांच अंकों का वेतनधारी नहीं, संस्कारों से सुसज्जित नागरिक बनाइए : पूर्णिमा सिंह
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की अधिवक्ता पूर्णिमा सिंह ने कहा कि हिंदुत्व हमारी धर्म, संस्कृति और संस्कार है यही हमारी पहचान है। हिंदू धर्म के ग्रंथ जीवन जीने की कला सिखाते हैं। आज आवश्यकता है कि हम अपनी जड़ों से जुड़े रहें और नई पीढ़ी को भी अपनी संस्कृति से अवगत कराएं। उन्होंने मातृशक्ति को जननी, सृजनकर्ता और पालनहार बताते हुए कहा कि हिंदू धर्म में मातृशक्ति पूजनीय है। इतिहास में वीरांगनाओं ने समाज और राष्ट्र को दिशा दी है।
उन्होंने कृष्ण सुदामा की मित्रता का उदाहरण देते हुए कहा कि जीवन को सही दिशा देने वालों को अपना अनुगामी बनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि बच्चों को केवल वेतनधारी नहीं, बल्कि संस्कारवान नागरिक बनाइए, ताकि वे कहीं भी रहें, अपनी जड़ों से जुड़े रहें।

