बिलासपुरसीपत

सीपत-बलौदा मार्ग पर ‘खूनी खेल’; 200 मौतों के बाद भी प्रशासन मौन, PWD अधिकारी के पास जवाब नहीं!

बिलासपुर (सीपत): विकास के दावों और फाइलों के बीच पिसती जनता का सब्र अब जवाब दे चुका है। सीपत से बलौदा मार्ग, जो पिछले एक दशक में 200 से अधिक लोगों की बलि ले चुका है, अब एक बड़े जन-आंदोलन की ओर बढ़ रहा है। 20 करोड़ का टेंडर होने के बावजूद सड़क पर पसरा सन्नाटा और जिम्मेदार अधिकारियों की चुप्पी ने ग्रामीणों के गुस्से में घी डालने का काम किया है।

​10 साल पहले भी 20 करोड़, आज भी वही आंकड़ा!

​सड़क निर्माण की विडंबना देखिए कि सन 2014-15 में यह सड़क 20 करोड़ 84 लाख रुपये की लागत से बनी थी। आज 10 साल बाद, जब महंगाई और यातायात का दबाव कई गुना बढ़ चुका है, तब भी प्रशासन 20 करोड़ का ही टेंडर लेकर बैठा है। ग्रामीणों का सवाल है कि क्या प्रशासन फिर से उसी पुरानी गुणवत्ता वाली सड़क के नाम पर खानापूर्ति करना चाहता है?

​अधिकारियों का रवैया: फोन पर ‘मौन’ और बैठक में ‘युद्ध’ का बहाना

​इस बदहाल सड़क को लेकर पीडब्ल्यूडी एसडीओ रविंद्र अकेला का रवैया सबसे अधिक चर्चा का विषय बना हुआ है।

  • ​जानकारी का अभाव: ग्रामीणों और पत्रकारों का आरोप है कि जब भी सड़क के काम की प्रगति जानने के लिए एसडीओ को फोन किया जाता है, तो वे कभी भी पूर्ण जानकारी नहीं देते और सवालों से बचते नजर आते हैं।
  • ​अजीब तर्क: हाल ही में हुई त्रिस्तरीय बैठक में अधिकारियों ने सड़क न बनने का ठीकरा ‘ईरान-अमेरिका युद्ध’ पर फोड़ दिया। तर्क दिया गया कि युद्ध के कारण डामर के रेट 50% बढ़ गए हैं, इसलिए ठेकेदार एग्रीमेंट नहीं कर रहा।

​बैठक में बनी रणनीति: 1 जून को थमेंगे पहिए

​नायब तहसीलदार पूनम कनौजिया और डीएसपी लालचंद मोहले , सीपत थाना प्रभारी राजेश मिश्रा की उपस्थिति में हुई बैठक में जनप्रतिनिधियों ने प्रशासन को आईना दिखाया।

  • ​अल्टीमेटम: अगले 15 दिनों के भीतर ‘पैच रिपेयरिंग’ का काम शुरू करने का आश्वासन दिया गया है।
  • ​चेतावनी: यदि 15 दिन में काम धरातल पर नहीं दिखा, तो 1 जून को उग्र चक्काजाम किया जाएगा।

​इनकी रही मौजूदगी

​बैठक में धनिया सरपंच दुष्यंत यादव, सरपंच संघ अध्यक्ष शैलेंद्र खांडेकर , भाजपा मंडल अध्यक्ष दीपक शर्मा , प्रमोद जायसवाल, कोमल पाटनवर, जनपद सदस्य देवेश शर्मा, पूर्व जनपद सदस्य लक्ष्मी साहू, नूर मोहम्मद, एवं लूथरा इंतजामिया कमेटी के सचिव, वरिष्ठ पत्रकार रियाज अशरफी सहित भारी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे, जिन्होंने एक सुर में प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोला।

​सड़क नहीं, ‘मौत का जाल’

  • ​जानलेवा गड्ढे: धूल के गुबार और जर्जर रास्तों के कारण हर दिन 2 से 3 राहगीर लहूलुहान हो रहे हैं।
  • ​100 गांवों का दर्द: यह सड़क इस क्षेत्र के 100 गांवों की जीवनरेखा है, जिसे विभाग की लापरवाही ने ‘डेथ-लाइन’ में बदल दिया है।

​सवाल जनता का:

​जब बजट स्वीकृत है और टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, तो फिर अधिकारियों की टालमटोल नीति किसके इशारे पर चल रही है? क्या पीडब्ल्यूडी के अधिकारी अभी और लाशें बिछने का इंतजार कर रहे हैं?

​निष्कर्ष: अगर 15 दिन में सड़क पर मशीनें नहीं उतरीं, तो 1 जून को सीपत क्षेत्र में होने वाले महा-आंदोलन की पूरी जिम्मेदारी प्रशासन और पीडब्ल्यूडी विभाग की होगी

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Home
login
Wtsp
Search
Insta
CONTACT
error: Content is protected !!