बिलासपुर:
शहर के अनुसूचित जाति एवं जनजाति छात्रावासों में पनप रही बदहाली और प्रशासनिक लापरवाही के खिलाफ अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) का आक्रोश खुलकर सामने आ गया है। एबीवीपी बिलासपुर महानगर के बैनर तले कार्यकर्ताओं ने मुख्य छात्रावास अधिकारी को उग्र ज्ञापन सौंपते हुए छात्र जीवन के साथ हो रहे खिलवाड़ पर कड़ी आपत्ति जताई है। परिषद ने स्पष्ट किया है कि यदि तीन दिनों के भीतर व्यवस्थाओं को दुरुस्त नहीं किया गया, तो उग्र आंदोलन किया जाएगा।
’मौके के इंतजार’ में बैठा प्रशासन? मंदिर चौक छात्रावास बना नरक
प्रशासनिक उदासीनता की बानोगी पेश करता मंदिर चौक, जरहाभाठा स्थित छात्रावास इन दिनों किसी खतरे के जोन से कम नहीं है। ज्ञापन में मुख्य रूप से रेखांकित किया गया है कि:
- जलभराव और जानलेवा भवन: परिसर में पिछले कई दिनों से जलभराव की गंभीर समस्या बनी हुई है, जिससे आवागमन पूरी तरह प्रभावित है। ऊपर से छात्रावास भवन की जर्जर स्थिति कभी भी किसी बड़े हादसे को न्योता दे सकती है।
- मौत का साया (विषैले जीव और बीमारियां): पानी जमा होने के कारण परिसर में सांप, बिच्छू जैसे जहरीले जीव-जंतु खुलेआम घूम रहे हैं। इसके साथ ही, गंदे पानी और गंदगी के चलते डेंगू, मलेरिया और फूड पॉइजनिंग जैसी घातक संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा अपने चरम पर है।
”सिर्फ एक नहीं, पूरे जिले के छात्रावासों का यही है हाल”
मामले को गंभीरता से उठाते हुए एबीवीपी बिलासपुर महानगर सह मंत्री प्रणव गौतम ने कहा कि स्थिति केवल एक छात्रावास तक सीमित नहीं है, बल्कि जिले के अन्य छात्रावासों में भी छात्र नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं।
एबीवीपी की दो टूक मांगें
परिषद ने प्रशासन के समक्ष कड़े शब्दों में तीन सूत्रीय मांगें रखी हैं:
- तत्काल निरीक्षण: जिले के सभी अनुसूचित जाति एवं जनजाति छात्रावासों की जमीनी हकीकत जानने के लिए फौरन विशेष टीमों द्वारा निरीक्षण किया जाए।
- सुरक्षा और बुनियादी सुविधाएं: छात्रों की सुरक्षा और स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं तत्काल प्रभाव से सुनिश्चित की जाएं।
- 3 दिन का अल्टीमेटम: ज्ञापन सौंपने की तिथि से तीन दिवस के भीतर सभी समस्याओं का स्थायी और प्रभावी निराकरण किया जाए, अन्यथा एबीवीपी छात्रहित में सड़क पर उतरने के लिए बाध्य होगी।


