रायपुर: छत्तीसगढ़ में ‘प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना’ (PMKKKY) और जिला खनिज न्यास (DMF) निधि का मुद्दा एक बार फिर सुर्खियों में है। हाल ही में भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट ने जहाँ प्रशासनिक ढांचे में गंभीर खामियां उजागर की हैं, वहीं सुप्रीम कोर्ट ने भी एक बड़े मामले में आरोपियों को जमानत देते हुए इस पूरे तंत्र की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
CAG रिपोर्ट: कागजों पर विकास, जमीनी हकीकत में ‘खाली पद’
सीएजी की ताजा रिपोर्ट में छत्तीसगढ़ में DMF के क्रियान्वयन को लेकर कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं:
- कुशल मानव संसाधन का संकट: रिपोर्ट के अनुसार, फंड का सही उपयोग सुनिश्चित करने के लिए कुशल मैनपावर की भारी कमी है। बेमेतरा और महासमुंद जैसे जिलों में तो सभी स्वीकृत पद खाली पड़े हैं।
- जिलों में आधा अधूरा तंत्र: बालोद, बिलासपुर, रायगढ़ और राजनांदगांव जैसे खनिज बहुल जिलों में भी स्थिति कमोबेश वैसी ही है, जहाँ महत्वपूर्ण पदों पर 50 प्रतिशत से अधिक रिक्तियां हैं।
- पारदर्शिता का अभाव: सीएजी ने इस बात पर चिंता जताई है कि DMF पोर्टल और वेबसाइट पर न तो महत्वपूर्ण जानकारी उपलब्ध है और न ही उन्हें नियमित रूप से अपडेट किया जाता है, जिससे पारदर्शिता का दावा खोखला साबित हो रहा है।
सुप्रीम कोर्ट में भी ‘DMF’ की गूंज
सीएजी की ऑडिट रिपोर्ट के समानांतर, कानूनी स्तर पर भी हलचल तेज है। 15 जुलाई 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने DMF से जुड़े एक भ्रष्टाचार और फंड डायवर्जन के मामले में मुख्य आरोपियों में से एक को जमानत दे दी। इस मामले में पूर्व आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा का नाम भी शामिल रहा है, जिन्हें पहले ही जमानत मिल चुकी है। आरोप है कि स्थानीय खनन-प्रभावित समुदायों के कल्याण के लिए आवंटित करोड़ों रुपयों का दुरुपयोग किया गया और अनुबंध देने में अवैध कमीशन लिया गया।
पोर्टल 2.0 की उम्मीदें बनाम धरातल की चुनौतियां
सरकार ने हाल ही में DMF फंड की मॉनिटरिंग के लिए ‘DMF पोर्टल 2.0’ लॉन्च करने का दावा किया है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक जिलों में प्रशासनिक पदों को भरा नहीं जाएगा और जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक केवल तकनीक से भ्रष्टाचार को रोकना मुश्किल होगा।
रिपोर्ट की प्रमुख सिफारिशें:
- संस्थागत मजबूती: DMF ट्रस्टों में कुशल मानव संसाधन की नियुक्ति अनिवार्य हो।
- खरीद प्रक्रिया में स्पष्टता: टेंडर और खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता के लिए सख्त नियमों का पालन हो।
- वित्तीय ऑडिट: फंड का उपयोग केवल खनन प्रभावित क्षेत्रों के कल्याणकारी कार्यों में हो, न कि अन्य निर्माण कार्यों में।
समीक्षा : छत्तीसगढ़ सरकार एक तरफ खनिज राजस्व के मामले में बड़े रिकॉर्ड बनाने का दावा कर रही है, तो दूसरी ओर सीएजी और अदालती टिप्पणियां इस विकास यात्रा के पीछे छिपे ‘वित्तीय प्रबंधन’ के गहरे घावों को उजागर कर रही हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि राज्य प्रशासन इन सिफारिशों को लागू करने के लिए क्या कदम उठाता है।


