रायपुर, 7 जुलाई 2026
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य की अमूल्य वन संपदा और जैव विविधता की सुरक्षा के लिए एक बड़ा तकनीकी कदम उठाया है। वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग द्वारा विकसित ‘ऑटोमेटेड फॉरेस्ट फायर अलर्ट सिस्टम’ अब वनाग्नि की घटनाओं को नियंत्रित करने में एक गेम-चेंजर साबित हो रहा है।
मुख्यमंत्री की प्राथमिकता: सुरक्षित वन, सुरक्षित पर्यावरण
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने स्पष्ट किया है कि वन संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उनके मार्गदर्शन में सरकार आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर रही है ताकि जंगलों को आग से होने वाले नुकसान से बचाया जा सके। मुख्यमंत्री का मानना है कि तकनीक और बेहतर प्रबंधन का मेल ही ‘विकसित छत्तीसगढ़’ की नींव है।
वन मंत्री के नेतृत्व में तकनीकी कायाकल्प
वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप ने इस प्रणाली को वन विभाग के लिए एक बड़ी उपलब्धि बताया है। उनके मार्गदर्शन में विभाग ने अपनी कार्यप्रणाली को पूरी तरह से पारदर्शी और तेज बनाया है। श्री कश्यप के अनुसार:
- त्वरित रिस्पॉन्स: आग लगने की सूचना मिलने का समय 1-2 घंटे से घटकर अब मात्र 5 से 10 मिनट रह गया है।
- सटीक तकनीक: सैटेलाइट और AI आधारित सिस्टम से आग के सटीक स्थानों की तुरंत पहचान हो रही है।
- सतर्क प्रहरी: यह सिस्टम न केवल आग पर नजर रख रहा है, बल्कि फील्ड स्टाफ की सक्रियता को भी सुनिश्चित कर रहा है।
महत्वपूर्ण उपलब्धियां:
- रियल-टाइम डैशबोर्ड: GIS आधारित तकनीक से अधिकारी हर घटना की ऑनलाइन मॉनिटरिंग कर रहे हैं।
- प्रभावी नियंत्रण: आग की पुष्टि होते ही तत्काल एसएमएस और ई-मेल अलर्ट, जिससे समय रहते कार्रवाई संभव है।
- जनभागीदारी: तकनीक के साथ-साथ हर वर्ष फायर लाइन निर्माण, प्रशिक्षण और मॉक ड्रिल के जरिए लोगों को जागरूक किया जा रहा है।


